आज कल के खून के रिश्तें
उम्र भर साथ न देने वाले भी
जीवन के अंतिम दिन
सिर्फ खंदा देने आते है।
दूसरों पे अपनी जिम्मेदारी लेने की अपेक्षा करने वाले
वक्त आने पे दूसरों की जिम्मेदारी लेने से कतराते है।
माँ बाप एक ही रिश्ता होता है जो जैसे भी हो वैसे स्वीकारते है।
झगड़ा गीला शिकवे के बावजूद भी मन मैं कुछ मलाल नहीं रखते बच्चों का भला ही चाहते है।
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