post 112 अमर प्रेम चित्रपट

राजेश खन्ना च्या एका चित्रपटावर एकाची प्रतिक्रिया वाचली होती youtube वर! 

@Philosophergolu

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इंसान सब कुछ भूल सकता है लेकिन उन लोगों को नहीं जिन्होंने कोई रिश्ता न होते हुए भी उसके दर्द को बांटा हो, आंसुओं को पोंछा हो, और बिना किसी स्वार्थ के प्यार दिया हो। कोई सहानुभूति की नजर से देख भी ले तो कुचले हुए इंसान को उन आंखों में भगवान दिखने लगता है। कोई किसी धुतकारे हुए इंसान के बगल में बैठ कर दो पल मुस्कुरा के बात कर ले तो सामने वाले के अंदर सालों से भरे हुए अकेलेपन का अंधेरा मानो एक पल में छंट जाता है। यदि दूसरे शब्दों में कहूं तो हर इंसान प्रेम और करुणा के लिए तरस और भटक रहा है। कभी अकारण किसी का दुख बांट कर देखिएगा, आप के खुद के अंदर लगी हुई अशांति की आग एक पल में न बुझ गई और मन शांत न हो गया तो कहिएगा।

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