कविता भावना

क्या हम पत्थर दिल हो गए है
किसी की भावनाएं अब दिल तक पोहचती ही नहीं
लोग भरोसा तोड़ देते है
साथ छोड़ देते है
अब किसीसे बात करने का मन नही करता
दिल जब मासूम था तब बड़ी दोस्ती की बातें करता था
लोग तो मतलब के लिए जिंदगी में आते है
और खुद की मर्जी से साथ छोड़ देते है

भावना शून्य लोगों का चंद पल साथ मिला
और इस दिल को पत्थर दिल बना डाला

अब हम ख़ुद में लिए जिते है
न किसीसे उमीद  बाकी
न किसीसे कोई अपेक्षा
ये जिंदगी चंद लम्हों का सफर है
युही बीत जाएगी
चलते चलते

Vidyamslife
26.2.2025

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