गुरुकुल पद्धति अच्छी है यहाँ विद्यार्थियों के गुण देख कर उनको शिक्षा मिलती थी ना कि मार्क देखकर क्षेत्र में जाना पढ़ता था! आज कल व्यक्तिमत्व विकास , चरित्र बनानेसे ज्यादा विद्यार्थी कितना होशियार है और आगे जाके कितना पैसा कमाएंगे इसपर ध्यान दिया जाता है! गुरुकुल मठ मंदिरों के पास ही होते थे ताकि जो दान दिया जाए उसका भी समाज के लोगों को कल्याण हो सके , शिक्षा व्यवस्था ,आरोग्य व्यवस्था भी दी जाए ! गुरुकुल व्यवस्था में विद्यार्थी समाज से भिक्षा मांगते थे और शिक्षा और अन्न दोनो मिलता था ऐसी व्यवस्था से ही समाज के प्रति ऋणी भी होके कोई बाद में समाज से कटता नहीं था ! आज कल तो बाजार बना दिया गया है शिक्षा व्यवस्था का , गुरुकुल पद्धति दुबारा शुरू होनी चाहिए !
Vidyamsife

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